राजधानी चौपाल, हरियाणा
Health update : मई-जून की भीषण गर्मी का दौर अब आ गया है और इस चिलचिलाती धूप और 40 डिग्री के पार जाते पारे ने खान-पान की आदतों को बदलने पर मजबूर कर दिया है। हरियाणा और उत्तर भारत के घरों में गर्मियों का मतलब दही और छाछ से सजी थाली होता है। दूध से बनने वाली ये दोनों चीजें सेहत का खजाना हैं, लेकिन जब बात ‘हीट वेव’ से लड़ने की आती है, तो छाछ को अक्सर दही पर बढ़त मिलती दिखती है। विशेषज्ञों के अनुसार, दही जहां एक संपूर्ण आहार है, वहीं छाछ एक बेहतरीन ‘डिटॉक्स ड्रिंक’ के रूप में काम करती है।
Health update : दही ऊर्जा और प्रोबायोटिक्स का पावरहाउस
दही में प्रोटीन, विटामिन B12 और पोटैशियम की प्रचुरता होती है। यह पेट के गुड बैक्टीरिया को बढ़ाकर इम्यूनिटी मजबूत करता है। दोपहर के भोजन में दही-चावल या लस्सी का सेवन न केवल पेट भरता है, बल्कि शरीर को लंबे समय तक ऊर्जावान भी रखता है। हालांकि, दही की तासीर थोड़ी भारी होती है, इसलिए आयुर्वेद इसे रात में खाने से मना करता है। यदि आपको हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों के लिए अधिक प्रोटीन चाहिए, तो दही एक शानदार विकल्प है।
Health update : छाछ डिहाइड्रेशन और एसिडिटी का रामबाण इलाज
छाछ को भारतीय रसोई का सबसे असरदार ‘नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट’ माना जाता है। दही को मथकर और उसमें अतिरिक्त पानी मिलाकर तैयार की गई छाछ शरीर को तुरंत ठंडा करती है। इसमें काला नमक, भुना जीरा और पुदीना मिलाने से यह पाचन तंत्र के लिए जादू की तरह काम करती है। गर्मियों में पसीने के जरिए शरीर से निकलने वाले नमक की भरपाई करने में छाछ से बेहतर कुछ नहीं है। कम कैलोरी होने के कारण यह वजन घटाने वालों के लिए भी पहली पसंद है।
Health update : आयुर्वेद और विशेषज्ञों की राय
आयुर्वेद में छाछ को ‘तक्र’ कहा गया है और इसे उन लोगों के लिए सर्वोत्तम माना गया है जिनका पाचन कमजोर है या जिन्हें अक्सर एसिडिटी रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप भारी भोजन कर रहे हैं, तो उसके बाद एक गिलास छाछ पाचन को आसान बना देगी। वहीं, सुबह के नाश्ते या लंच के साथ दही का सेवन पोषण के लिहाज से बेहतर है। निष्कर्ष यह है कि गर्मियों में हाइड्रेटेड रहने के लिए ‘छाछ’ ज्यादा असरदार है, जबकि पोषण के लिए ‘दही’ श्रेष्ठ है।